CHHAPRA DESK- खुश रहना बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि व्यक्ति की सोच, दृष्टिकोण और परिस्थितियों को स्वीकार करने की क्षमता पर निर्भर करता है. हालांकि हर किसी के जीवन में उतार- चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ उनका सामना किया जाए तो कठिन परिस्थितियों में भी जीवन को खुशनुमा बनाया जा सकता है. उक्त बातें प्रख्यात अंतर्राष्ट्रीय काउंसलर ईवी गिरीश भाई (मुंबई) ने छपरा में आयोजित त्रिदिवसीय राजयोग शिविर के दूसरे दिन शहर के भिखारी ठाकुर प्रेक्षा गृह में कही. उन्होंने कहा कि आज कि भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य भौतिक सुविधाओं के पीछे लगातार भाग रहा है, लेकिन मानसिक शांति और संतुष्टि से दूर होता जा रहा है.
सकारात्मक सोच और आत्मचिंतन को बताया सफलता की कुंजी
ईवी गिरीश ने कहा कि खुशनुमा जीवन की शुरुआत स्वयं से होती है. हर व्यक्ति यदि दूसरों को बदलने के बजाय अपनी सोच और प्रतिक्रिया को बदलने का प्रयास करे, तो कई समस्याएं स्वत: आसान हो जाती हैं. उन्होंने प्रतिभागियों को जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, स्वयं के भीतर झांकने और अपनी भावनाओं को समझने की सलाह देते हुए कहा कि नकारात्मक विचार व्यक्ति की ऊर्जा और कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं. इसके विपरीत सकारात्मक विचार आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और व्यक्ति को बेहतर निर्णय लेने में मदद करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी क्षमताओं को पहचानना और हर परिस्थिति से कुछ सीखना चाहिए.
जीवन में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी
राजयोग के महत्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि नियमित आत्मचिंतन और ध्यान मन को स्थिर करने में सहायक है. जब मन शांत होता है तो व्यक्ति परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझ पाता है और कठिन समय में भी संतुलित निर्णय ले सकता है. व्यक्ति के पास संसाधन बढ़ रहे हैं, लेकिन तनाव, चिंता और असंतोष भी बढ़ता जा रहा है. ऐसे में जीवन में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है. इस अवसर पर जिला कला एवं संस्कृति सह खेल पदाधिकारी डॉ विभा भारती, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय छपरा की मुख्य संचालिका ब्रह्मकुमारी अनामिका दीदी, बीके अरविंद भाई, धर्मेंद्र रस्तोगी, बीके भाई और बहनों सहित कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे.

