CHHAPRA DESK- सारण जिले में मलेरिया की पहचान और रोकथाम के अभियान को अब स्वास्थ्य विभाग और तेज करने जा रहा है. सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की ओपीडी में बुखार की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की मलेरिया जांच करायी जाएगी. इसके लिए सभी संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में मलेरिया जांच किट और माइक्रोस्कोपिक स्लाइड की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही आशा कार्यकर्ताओं को भी ऐसे मरीजों की पहचान करने और उन्हें जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गयी है. विभाग का उद्देश्य मलेरिया के मामलों की समय पर पहचान कर उपचार शुरू करना और संक्रमण के प्रसार को रोकना है. देश में मलेरिया नियंत्रण और उन्मूलन के लक्ष्य के तहत वर्ष 2027 तक स्वदेशी मलेरिया मामलों को शून्य करने तथा 2030 तक बिहार को मलेरिया मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसी दिशा में जिले में बुखार से पीड़ित मरीजों की अधिक से अधिक मलेरिया जांच कराने पर जोर दिया जा रहा है.

घर-घर पहुंचकर मरीज खोजेंगी आशा

मलेरिया की पहचान बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण कर दी है. आशा कार्यकर्ताओं को अपने क्षेत्र में बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान करने और जरूरत के अनुसार उन्हें मलेरिया जांच के लिए प्रेरित करने तथा स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है. इसके अलावा समय-समय पर मलेरिया जांच शिविर, घर-घर मलेरिया रोगी खोज अभियान और वेक्टर जनित रोग नियंत्रण से जुड़े अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इनके माध्यम से सक्रिय रोगी खोज यानी एक्टिव केस डिटेक्शन (ACD) को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि ऐसे मरीज भी सामने आ सकें जो किसी कारण से अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं पहुंच पाते हैं.