CHHAPRA DESK- सारण तटबंध के टूटने के बाद मकेर के बाद अमनौर व पानापुर के बाद अब परसा में बाढ़ का पानी पूरे गांव में प्रवेश कर चुका है. जिसके कारण वहां जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है. वहीं सरकारी स्तर पर अभी तक कोई राहत या सामुदायिक किचन नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों में खासा आक्रोश भी है. रेवाघाट और लगुनिया के पास बांध टूटने के बाद परसा प्रखंड की कई पंचायतों के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. बाढ़ का पानी तेजी से गांवों में फैलने के कारण ग्रामीणों के सामने भोजन, जलावन और सुरक्षित स्थान की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है. ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ की स्थिति गंभीर होने के बावजूद प्रभावित इलाकों में सामुदायिक किचन और पर्याप्त राहत सामग्री की व्यवस्था नहीं की गई है. इससे बाढ़ पीड़ित परिवारों की परेशानी बढ़ती जा रही है और कई लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं. परसा प्रखंड क्षेत्र के अन्याय, गौरीगवां, बनौता, बथुई, माड़र, अंजनी सहित कई पंचायतों के दो दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने की बात सामने आ रही है. ग्रामीणों के अनुसार कई घरों में रसोई का सामान, राशन और जलावन तक खत्म हो चुका है. पानी से घिरे परिवार किसी तरह अपने भोजन का इंतजाम कर रहे हैं.
छह फीट से अधिक पानी घुसने का दावा
अन्याय पंचायत के अजय साह, राजेंद्र साह, वीरेंद्र साह, छोटू राय, भोला सिंह, जवाहर राय, जयनाथ राय, दशरथ साह, दरोगा राय, भरत सिंह, मनोहर साह, गोपाल साह, विजय कुमार, जगलाल राम, तेतरी देवी, अनीता देवी, उर्मिला देवी, सीता देवी, रजिया देवी सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि उनके घरों में करीब छह फीट से अधिक बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है. ग्रामीणों का कहना है कि घरों में खाने-पीने का सामान समाप्त हो चुका है. जलावन भी नहीं बचा है, जिससे खाना बनाना मुश्किल हो गया है. इसके बावजूद अब तक सामुदायिक किचन शुरू नहीं होने और राहत सामग्री नहीं मिलने से लोगों में आक्रोश है.
अधिकारी से संपर्क नहीं होने का ग्रामीणों का आरोप
अधिकारी से संपर्क नहीं होने का ग्रामीणों का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि समस्या को लेकर अंचलाधिकारी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कई बार फोन नहीं उठाया गया. इससे बाढ़ पीड़ितों में नाराजगी और बढ़ गई है. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावित गांवों में सामुदायिक किचन शुरू कराने, भोजन एवं राशन उपलब्ध कराने, नाव की व्यवस्था करने तथा सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की मांग की है.


