CHHAPRA DESK- सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी डॉ राहुल राज ने बड़ा उलटफेर करते हुए शानदार जीत दर्ज की है. भाजपा से निष्कासित राहुल राज ने एनडीए समर्थित प्रत्याशी आनंद पुष्कर को 1815 मतों से पराजित कर राजनीतिक गलियारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है. शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के इस चुनाव में राहुल राज की जीत को एनडीए के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. चुनाव में एनडीए और जन सुराज के प्रत्याशियों के बीच कड़ी चुनौती पेश करने वाले राहुल राज ने मतगणना के अंतिम परिणाम में दोनों को पीछे छोड़ दिया।मतगणना के परिणाम के अनुसार, राहुल राज को कुल 4965 मत मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी आनंद पुष्कर को 3150 मत प्राप्त हुए. इस तरह राहुल राज ने स्पष्ट अंतर से जीत हासिल की. जन सुराज के प्रत्याशी आफाक अहमद 2454 मत प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे. वहीं, राजद के प्रत्याशी जयराम यादव को 1708 मत मिले और वे चौथे स्थान पर रहे. चुनाव में मुख्य मुकाबला राहुल राज और आनंद पुष्कर के बीच माना जा रहा था, लेकिन परिणाम ने राजनीतिक समीकरणों को बदलकर रख दिया.
शिक्षकों की मांगों को सदन में उठाने का भरोसा
जीत के बाद डॉ राहुल राज ने शिक्षकों के हितों को प्राथमिकता देने की बात कही. उन्होंने कहा कि शिक्षकों की लंबित मांगों को पूरा कराने के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी. सातवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतनमान दिलाना और वित्त रहित शिक्षकों को अनुदान के बदले नियमित वेतनमान उपलब्ध कराना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं को लेकर वे सदन से लेकर संबंधित विभागों तक आवाज उठाएंगे।राहुल राज ने वित्त रहित शिक्षकों की अनुदान राशि सीधे उनके बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से भेजने की व्यवस्था के लिए भी प्रयास करने का भरोसा दिया. उनका कहना था कि शिक्षकों को अपने काम के लिए सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता है. इस स्थिति में बदलाव जरूरी है. कार्यालयों में शिक्षकों के बैठने की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए. उन्होंने शिक्षकों के हित में आकस्मिक दुर्घटना कोष बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. कहा कि शिक्षकों की सुरक्षा, सम्मान और सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाएगा। उनकी कोशिश होगी कि शिक्षकों को अपने अधिकारों के लिए बार-बार कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़े और उनकी समस्याओं का समय पर समाधान हो सके.
भाजपा में वापसी का फैसला शिक्षकों पर छोड़ा
भाजपा में वापसी के सवाल पर राहुल राज ने कहा कि उनकी विचारधारा से सभी परिचित हैं, लेकिन पार्टी में वापसी का फैसला वह शिक्षकों पर छोड़ते हैं. उल्लेखनीय है कि भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के विरुद्ध चुनाव लड़ने के कारण पार्टी ने उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था. इसके बावजूद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया और जीत हासिल की. राहुल राज वर्तमान में रिविलगंज के प्रखंड प्रमुख भी हैं. शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में उनकी जीत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस चुनाव में शिक्षकों के मुद्दे और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ भी अहम रहे. निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मिली इस सफलता के बाद अब शिक्षकों की लंबित मांगों को पूरा कराने और उनके मुद्दों को विधान परिषद में प्रभावी ढंग से उठाने की चुनौती उनके सामने होगी.

