CHHAPRA DESK - सारण जिले के सिमरिया घाट पर जल्द ही विद्युत शवदाह गृह शुरू होने वाला है. काम अंतिम चरण में है और सब कुछ बनकर तैयार है. बस ! देर उद्घाटन की है. इस शवदाह गृह के शुरू होने के बाद गरीब परिवारों को लकड़ी के भारी भरकम बोझ से राहत मिलेगी और कम खर्च में शव का दाह किया जा सकेगा. वहीं बरसात के दिनों में शव जलाने की विकट समस्या से भी निजात मिलेगा. इसके साथ ही 4 से 6 घंटे तक शव को जलाने के समय का इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा. जिससे समय की बचत भी होगी. इस शवदाह गृह में शव को दाहने के लिए दो व्यवस्था होगी. पहली व्यवस्था में शव को चैनल पर रखने के बाद उसे सीधे बॉक्स में डालकर स्विच ऑन करते ही सब कुछ जलकर स्वाहा हो जाएगा. तो दूसरी व्यवस्था में वैसे लोगों को सुविधा मिलेगी जो लकड़ी से शल को जलाना चाहते हैं. वैसी स्थिति में उन्हें इलेक्ट्रिक शवदाह गृह के दूसरे चेंबर में चैनल के ऊपर लकड़ी के साथ शव को सजाने और फिर मुखाग्नि के बाद उसे चेंबर में डालकर जलाने की व्यवस्था होगी, लेकिन उन्हें 70 और 80 किलो लकड़ी के बजाय महज 30 से 35 किलो लकड़ी लगाना पड़ेगा जो की इलेक्ट्रिक के साथ शव को जलाने में काम करेगा.
लावारिस लाशों के लिए वरदान साबित होगा यह विद्युत शवदाह गृह
जिले में प्रति माह सड़क दुर्घटना अथवा रेलवे लाइन पर कटने से ऐसे करीब दर्जनभर शव मिलते हैं जिनकी पहचान नहीं हो पाती है. ऐसी स्थिति में उसके दाह संस्कार की जिम्मेवारी प्रशासन को ही उठानी पड़ती है और उस शव को जैसे तैसे डीकंपोज कर दिया जाता है. क्योंकि हजारों रुपए की लकड़ी खरीद कर जलने की व्यवस्था नहीं हो पाती है ऐसी स्थिति में कई बार लावारिस लाशों को पोस्टमार्टम के बाद नदी में फेंक दिया जाता है या फिर कहीं दफना दिया जाता है. अब विद्युत शवदाह गृह के शुरू होने के बाद वैसे लावारिस लाशों को भी यहां पर दाहा जा सकेगा.


