CHHAPRA DESK- सारण प्रमंडल डाक विभाग में सरकारी लक्ष्यों (टारगेट) को कागजों पर शत-प्रतिशत दिखाने के लिए सारण डाक प्रमंडल में एक बड़ा खेल हुआ है. कई अधिकारी और कर्मचारी द्वारा मिलकर फर्जीवाड़े की गई है. जन्म विभाग की वित्तीय योजनाओं (RD और TD) का ग्राफ चमकाने के लिए अफसरों और कर्मियों ने न सिर्फ नियमों को ताक पर रख दिया, बल्कि वास्तविक ग्राहकों की जगह खुद अपने और अपने परिजनों के नाम पर ही थोक (बल्क) में सैकड़ों खाते खोल डाले.यह सनसनीखेज मामला वरीय डाक अधीक्षक (एसएसपीओ) रासबिहारी राम के सेवानिवृत्ति के दिन खुलकर सामने आया. जिसके बाद डाक महकमे के भीतर हड़कंप मचा हुआ है. अब इन खातों की मैच्योरिटी पर असली परेशानी तब सामने आ रही है, जब भुगतान के लिए ग्राहकों और खाताधारकों को डाकघरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं.
मार्च क्लोजिंग का करिश्मा: एक ही दिन में एक ही नाम पर 100 खाते
जिला मुख्यालय में पदस्थापित डाक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि मार्च क्लोजिंग के दौरान छपरा प्रधान डाकघर में पदस्थापित वरीय पोस्टमास्टर उषा कुमारी के नाम पर एक ही दिन में 1,000-1,000 रुपये वाले 100 टीडी (टाइम डिपॉजिट) खाते खोल दिए गए. इतना ही नहीं, मढ़ौरा अनुमंडल के सहायक डाक अधीक्षक (ASP) संतोष कुमार के नाम पर भी टारगेट साधने के लिए ताबड़तोड़ खाते खोले गए. वहीं, मढ़ौरा हेड ऑफिस के पोस्टमास्टर सच्चिदानंद शर्मा के नाम पर जनवरी से मार्च के बीच 100 रुपये राशि वाले करीब 200 खातों सहित कुल लगभग 300 आरडी-टीडी खाते खोले जाने का सनसनीखेज दावा सामने आया है. सवाल उठता है कि एक ही व्यक्ति के नाम पर एक ही दिन में सौ-सौ खाते खोलने की इजाजत विभागीय सॉफ्टवेयर (सीबीएस) और नियमों ने कैसे दी ?
इंसेटिव का खेल: प्रति खाता 219 रुपये की प्रोत्साहन राशि
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे गोरखधंधे के पीछे केवल टारगेट का दबाव ही नहीं, बल्कि वित्तीय लाभ भी जुड़ा हुआ है. विभागीय नियमों के तहत खाता खोलने और संचालन के एवज में प्रति खाता लगभग ₹219 तक की प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) मिलने का प्रावधान है. आशंका जताई जा रही है कि फर्जी तरीके से बल्क खाते खोलकर सरकारी खजाने से बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन राशि भी निकाली गई है. अगर इन खातों के ट्रांजेक्शन, सीबीएस लॉग और कमीशन वाउचर की उच्चस्तरीय जांच हो, तो यह मामला सीधे वित्तीय गबन की श्रेणी में आ सकता है.
वीसी में फटकार, ट्रांसफर और वेतन रोकने की धमकी
ग्रामीण डाक सेवकों और उप डाकपालों ने दर्द बयां करते हुए बताया कि प्रमंडल स्तर पर होने वाली वर्चुअल बैठकों में अफसरों द्वारा भारी मानसिक दबाव बनाया जाता था. टारगेट पूरा न होने पर वेतन रोकने, प्रतिकूल प्रविष्टि (चैरेक्टर रोल खराब करने) और सुदूर इलाकों में तबादले की सीधी धमकियां दी जाती थीं,। इसी प्रताड़ना और नौकरी बचाने के डर से कई छोटे कर्मियों ने भी अपने, अपनी पत्नी और बच्चों के नाम पर जबरन खाते खोलकर पैसे जमा किए.
अमनौर, अपहर और बनियापुर में भुगतान अटका
टारगेट पूरा करने के लिए खोले गए इन 'कागजी' खातों का असर अब धरातल पर दिख रहा है. सारण के अमनौर, अपहर और बनियापुर उप डाकघरों में इन दिनों खाताधारकों की लंबी कतारें लगी हैं. बल्क में खोले गए इन खातों का जब भुगतान (मैच्योरिटी) का समय आया, तो तकनीकी पेंच, केवाईसी विसंगतियों और कैश की कमी का हवाला देकर लोगों को टरकाया जा रहा है. खाताधारक कई-कई दिनों से डाकघरों का चक्कर काट रहे हैं, जिससे विभाग की विश्वसनीयता तार-तार हो रही है.
पोस्ट मास्टर जनरल ने क्या कहा
इस मामले में पूछे जाने पर उत्तरी क्षेत्र मुजफ्फरपुर के पोस्ट मास्टर जनरल पवन कुमार ने कहा कि इस तरह का मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है. अगर ऐसा कुछ हुआ है तो गलत है.


