PATNA DESK - बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) की जांच रिपोर्ट के बाद नालंदा समाहरणालय (डीएम ऑफिस) में तैनात निम्नवर्गीय लिपिक सह रग्बी खिलाड़ी सुधांशु रंजन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया. आरोपी सुधांशु को पिछले साल ही 'मेडल लाओ-नौकरी पाओ' योजना के अंतर्गत खेल कोटे से सरकारी नौकरी मिली थी. हालांकि, खेल प्राधिकरण के महानिदेशक (DG) रवींद्रण शंकरण को उसके दस्तावेजों पर संदेह होने के बाद जब गहन जांच कराई गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. आरोपी ने न केवल अपने ऊपर दर्ज संगीन मुकदमों को छिपाया, बल्कि खेल के फर्जी दस्तावेज भी लगाए. खेल प्राधिकरण ने भारतीय रग्बी फुटबॉल संघ से साल 2022 के सभी मैचों और पुरस्कार वितरण समारोहों के वीडियो रिकॉर्ड मंगाकर जांच की. रिकॉर्ड के अनुसार, सुधांशु का नाम कागजों में तो दर्ज था, लेकिन वह किसी भी मैच या समारोह के वीडियो में कहीं नजर नहीं आया. चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस जर्सी नंबर-4 को पहनकर सुधांशु के खेलने का दावा किया गया था, मैदान पर उसे पहनकर कोई दूसरा ही खिलाड़ी खेल रहा था. बिहार राज्य खेल प्राधिकरण की ओर से की गई उच्च स्तरीय जांच में आरोपी सुधांशु रंजन से जुड़े कुछ अहम मामले सामने आए हैं. सुधांशु ने जूनियर नेशनल रग्बी-7 चैंपियनशिप 2022 का फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर नौकरी हासिल की, जबकि उसने एक भी मैच नहीं खेला था. आरोपी सुधांशु रंजन ने सरकारी सेवा में आते समय अपने ऊपर दर्ज गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी विभाग से पूरी तरह छिपाई. पटना एसएसपी और थाने से मिले दस्तावेजों के अनुसार, सुधांशु पर 25 सितंबर 2025 को आर्म्स एक्ट और शराबबंदी कानून के तहत केस दर्ज है. पुलिस की छापेमारी के दौरान सुधांशु के पास से अवैध हथियार, नकदी, कई मोबाइल, लैपटॉप और कैश काउंटिंग मशीन बरामद की गई थी.


डीजी ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी


बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक (DG) रवींद्रण शंकरण ने कहा कि खिलाड़ी ने सच्चाई छिपाकर और फर्जीवाड़ा कर नौकरी ली थी. उसने न तो कोई मैच खेला और न ही उसे कोई मेडल मिला था। प्राधिकरण ने 14 जुलाई को सामान्य प्रशासन विभाग को पुलिस रिपोर्ट और एफआईआर की प्रति भेज दी है, जिसके बाद नालंदा के जिलाधिकारी (DM) ने उसे तुरंत निलंबित कर दिया खेल प्राधिकरण ने इस धोखाधड़ी को बेहद गंभीरता से लिया है. प्राधिकरण की ओर से आरोपी सुधांशु रंजन के खिलाफ विभागीय स्तर पर कड़ी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को आधिकारिक अनुशंसा भेजी गई है. खेल कोटे में इस तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए अब अन्य नियुक्तियों के सत्यापन को भी कड़ा किया जा रहा है.