BUXAR / VAISHALI DESK - बिहार के बक्सर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक यात्री को ट्रेन में बंधक बना लिया गया और ₹10 हजार घर से नहीं मंगवाने के बाद उसका हाथ पैर बांध उसे ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया, जिसके कारण उसकी मौत हो गई. हालांकि इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए रेल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. जिससे पूछताछ की जा रही है. मृत युवक वैशाली निवासी 21 वर्षीय नितिन कुमार बताया गया है, जो कि हैदराबाद में मजदूरी करता था. वह बेंगलुरु से बिहार अपने घर लौट रहा था. 19 सितंबर 2026 को वह ट्रेन संख्या 07091 दानापुर स्पेशल ट्रेन में सवार था. नितिन के परिवार को अंदाजा भी नहीं था कि घर पहुंचने से पहले ट्रेन में ही उसके साथ ऐसी वारदात हो जाएगी. पुलिस के मुताबिक ट्रेन में आरोपी ने नितिन को अपना निशाना बनाया और उसे बंधक बना लिया. आरोप है कि परिवार से पैसे की मांग की गई. पुलिस के मुताबिक 10 हजार रुपये की फिरौती मांगी गई थी. इसके बाद नितिन के हाथ-पैर बांधकर उसे चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया. इससे उसकी मौत हो गई. इस मामले में बक्सर रेल थाना कांड संख्या 206/26 के तहत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया. रेल डीएसपी के नेतृत्व में टीम ने जांच आगे बढ़ाई. जांच के दौरान पुलिस को आरोपी रोहित के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद उसे बनारस से गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में रोहित ने नितिन को चलती ट्रेन से हाथ-पैर बांधकर फेंकने की बात कबूल की है. 

ऐसी वारदातों में रोहित पहले भी जा चुका है जेल 

 रेल पुलिस के मुताबिक आरोपी पहले भी इसी तरह की वारदात कर चुका है. पुलिस ने उसे आदतन अपराधी बताया है. पुलिस के मुताबिक साल 2024 में भी रोहित ने बक्सर के रहने वाले दो युवकों को ट्रेन से बाहर धकेल दिया था. उस घटना में दोनों युवकों की जान बच गई थी. इस मामले में रोहित को सजा हुई थी और वह सजा काटकर जेल से बाहर आया था. पुलिस का कहना है कि जेल से बाहर आने के बाद उसने एक बार फिर इसी तरह की वारदात को अंजाम दिया. यानि पुलिस की जांच में आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास भी सामने आया है.

कभी पुलिस, कभी STF बनकर बनाता था निशाना

 गिरफ्तारी के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेल डीएसपी कंचन कुमारी ने आरोपी के अपराध करने के तरीके के बारे में भी जानकारी दी. रेल डीएसपी के मुताबिक आरोपी कभी पुलिस का नाम इस्तेमाल करता था, कभी खुद को पुलिस का सिपाही बताता था, कभी GRP का सिपाही बनता था और कभी STF का नाम लेकर लोगों को अपना निशाना बनाता था. पुलिस के अनुसार वह इसी तरीके से अपने टारगेट चुनता था.